जब भी ISBT कौशांबी में निवेश की बात होती है, तो दो नाम सामने आते हैं — ओमेक्स और UPSRTC। और यह PPP मॉडल क्या है, यह सवाल अक्सर पूछा जाता है। इस लेख में सब कुछ सरल भाषा में समझाया गया है।

ओमेक्स बिटुगेदर क्या है?

BeTogether ओमेक्स लिमिटेड का एक अलग ब्रांड है जो सरकारी बस टर्मिनल्स के पुनर्विकास के लिए बनाया गया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश में छह UPSRTC बस टर्मिनल को आधुनिक कमर्शियल हब में बदला जा रहा है:

लोकेशनस्थिति
ISBT कौशांबी, गाजियाबादफ्लैगशिप — सबसे ज़्यादा ट्रांजिट कनेक्टिविटी
ISBT साहिबाबाद, गाजियाबादचल रहा है
लखनऊ गोमती नगरचल रहा है
लखनऊ अमौसीचल रहा है
अयोध्याचल रहा है
प्रयागराजचल रहा है

कुल निवेश: ₹2,800 करोड़। कौशांबी प्रोजेक्ट की कुल लागत: ₹261 करोड़।

PPP मॉडल क्या है — आसान भाषा में

PPP = Public Private Partnership — यानी सरकार और प्राइवेट कंपनी मिलकर काम करते हैं।

यहाँ:

  • Public (सरकारी) = UPSRTC — उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम। यह UP सरकार की कंपनी है जिसके पास ज़मीन और बस टर्मिनल है।
  • Private (प्राइवेट) = ओमेक्स लिमिटेड — NSE/BSE लिस्टेड कंपनी जो निर्माण, डेवलपमेंट और बिक्री करती है।

UPSRTC ने ओमेक्स को 90 साल का कन्सेशन दिया है — यानी 90 साल तक ओमेक्स इस जगह को डेवलप और ऑपरेट कर सकती है। इस दौरान खरीदारों को उनकी यूनिट पर पूर्ण कमर्शियल अधिकार मिलते हैं।

90 साल का कन्सेशन — यह कैसे काम करता है?

यह एक बहुत पूछा जाने वाला सवाल है। आसान जवाब:

  • आपकी यूनिट आपके नाम पर रजिस्टर होती है
  • कन्सेशन ट्रांसफरेबल है — आप इसे बेच सकते हैं
  • कन्सेशन विरासत में दिया जा सकता है — परिवार को मिलेगा
  • सरकार द्वारा मंजूर — सरकारी दस्तावेज़ से सत्यापित
  • यह फ्रीहोल्ड प्रॉपर्टी से अलग है, लेकिन कमर्शियल अधिकार वास्तविक और कानूनी हैं

ध्यान दें: बुकिंग से पहले Builder-Buyer Agreement ज़रूर पढ़ें। सौरभ से पूरा डॉक्यूमेंटेशन माँगें — कोई भी जानकारी छुपाई नहीं जाती।

ओमेक्स — कंपनी पर भरोसा क्यों?

  • NSE और BSE पर लिस्टेड — SEBI के तहत तिमाही वित्तीय खुलासे अनिवार्य
  • 30+ साल का रियल एस्टेट अनुभव
  • कई सफल कमर्शियल और रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट पूरे किए
  • UPSRTC जैसी सरकारी संस्था के साथ फॉर्मल PPP एग्रीमेंट

RERA से छूट क्यों?

यह प्रोजेक्ट RERA (रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट) से छूट प्राप्त है क्योंकि यह एक सरकारी PPP प्रोजेक्ट है। UPSRTC एक राज्य सरकार की संस्था है। इसलिए RERA नंबर की ज़रूरत नहीं है।

तीन यूनिट टाइप — कौन सा सही है आपके लिए?

यूनिट टाइपउद्देश्यस्थिति
बिज़नेस सुइट्सखुद का कार्यालयबुकिंग खुली — 15 जुलाई तक
स्टूडियो अपार्टमेंटप्री-लीज्ड निवेश / किरायाबुकिंग खुली — 200 यूनिट
रिटेल शॉप्सहाई-फुटफॉल दुकानजल्द लॉन्च

BeTogether और दूसरे कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में क्या फर्क है?

ओमेक्स के पास रेजिडेंशियल, कमर्शियल और टाउनशिप — सभी तरह के प्रोजेक्ट हैं। लेकिन BeTogether एक अलग थीसिस पर बना है:

  • सरकारी ज़मीन, सरकारी पार्टनर: प्राइवेट डेवलपर की ज़मीन से जुड़ा कोई टाइटल रिस्क नहीं। UPSRTC की सरकारी ज़मीन पर, UPSRTC के साथ फॉर्मल PPP एग्रीमेंट।
  • बस टर्मिनल बंद नहीं होगा: ISBT कौशांबी का ऑपरेशन जारी रहेगा — बस टर्मिनल बंद नहीं होता, इसलिए फुटफॉल स्थायी है।
  • कन्सेशन मॉडल: ओमेक्स के रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट फ्रीहोल्ड हैं। BeTogether 90-साल सरकारी कन्सेशन पर है — दोनों कानूनी रूप से वैध, लेकिन अलग-अलग संरचना।
  • मल्टी-सिटी रोलआउट: कौशांबी सबसे पहला और सबसे बड़ा BeTogether प्रोजेक्ट है। लखनऊ, अयोध्या, प्रयागराज में भी BeTogether है, लेकिन कौशांबी की 5-ट्रांजिट कनेक्टिविटी बेमिसाल है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल — PPP और कन्सेशन

क्या यूनिट मेरे नाम पर रजिस्टर होगी?
हाँ। बिज़नेस सुइट और स्टूडियो अपार्टमेंट दोनों खरीदार के नाम पर रजिस्टर होते हैं। 90-साल कन्सेशन के तहत पूर्ण कमर्शियल अधिकार मिलते हैं।

क्या NRI खरीद सकते हैं?
हाँ। FEMA नियमों के तहत NRI कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं। ज़रूरी दस्तावेज़ और प्रक्रिया की जानकारी सौरभ से WhatsApp पर लें।

होम लोन मिल सकता है?
कमर्शियल प्रॉपर्टी पर LAP (Loan Against Property) या कमर्शियल मॉर्गेज की सुविधा होती है। सौरभ बैंक कोऑर्डिनेशन में मदद कर सकते हैं।

90 साल बाद क्या होगा?
नवीनीकरण की शर्तें Builder-Buyer Agreement में होती हैं। 90 साल एक पूरी पीढ़ी से अधिक का है — बुकिंग से पहले BBA ज़रूर पढ़ें।

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अस्वीकरण: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है और निवेश सलाह नहीं है। रियल एस्टेट निवेश में जोखिम होता है। इन्फ्रास्ट्रक्चर टाइमलाइन सरकारी अनुमोदन के अधीन है और बदल सकती है। किराये की आय अनुमानित है, गारंटीकृत नहीं। निवेश निर्णय लेने से पहले किसी पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।